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Shilpi Goel

Abstract Fantasy Children

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Shilpi Goel

Abstract Fantasy Children

ख़ुशनुमा पल

ख़ुशनुमा पल

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वाटिका में फैली हर तरफ हरियाली

सैर करने आती सबकी देखो फैमिली।


बच्चे पूरा-पूरा दिन वाटिका में बिताते

इस तरह छुट्टियों का देखो लुत्फ उठाते।


रंग-बिरंगे पुष्प देखो सबका मन मोह जाते

ना ना प्रकार के झूले इनके दिल को भाते।


बुजुर्ग भी टहल कर अपना समय बिताते

बच्चों की खुशी में वह भी खुश हो जाते।


वर्षा ऋतु आने पर मोर अपना नाच दिखाते

आकाश में देखो इन्द्रधनुष के रंग सजते जाते।


जाने क्यों गुम हो गए वह ख़ुशनुमा से पल

लौटकर वापस आएंगे कब आएगा वह कल।


ईश्वर से है बस इतनी सी फरियाद 

बच्चे झूमे फिर उसी उमंग के साथ।


सारे बाग-बगीचे फिर से यूँ ही महकाएँ

बच्चे-बुजुर्ग फिर अपनी महफिल सजाएँ।


इन्हीं से तो बढ़ती है वाटिका की शोभा

इन्हीं का साथ देखो जाने कहाँ खो गया।


लौटकर जरूर आएंगे वह दिन

करते प्रतीक्षा हम हर पल छिन। 



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