खुशियों के गीत
खुशियों के गीत
खुशियों के गीत, गाए संसार
बढ़ते जाएं,आपस में हो प्यार,
जन-जन में हो शुद्ध व्यवहार
जीत सदा हो, कभी नहीं हार।
खुशियों के गीत,आपसी प्रीत
सदियों से चली आई यह रीत,
बैरा भुला बन जाओ बस मीत
फिर विश्व में होगी तुम्हारी जीत।
खुशियों के गीत, गाये ये संसार
आपस में दोस्ती बढ़ता जा प्यार,
भगवान ने दिया यह शरीर उधार
धर्म पास में नहीं जीना हो बेकार।
खुशियों के गीत, संग में हो मीत
दोस्ती हो बेहतर बढ़ेगी तब प्रीत,
दुष्ट ना कोई बने ,बस नाम कमा
भाईचारा हो, यही जग की है रीत।
खुशियों के गीत में झूमेंगे लोग,
बैर हो दूर, लगे खुशी के भोग,
सब स्वस्थ, नहीं हो कोई रोग
सभी में हो, प्रीत का संजोग।।
