STORYMIRROR

Pramesh Deep

Abstract Inspirational Others

4  

Pramesh Deep

Abstract Inspirational Others

खुशियों के दीपक जलाये

खुशियों के दीपक जलाये

1 min
218

दीवाली में रौशनी फैलाये

इस जग में उजियाला लाये 

इस दीवाली कुछ कर जाये 

खुशियों के दीपक जलाये


हर घर हो अब मंदिर जैसे 

माँ-बाप जहाँ भगवान जैसे 

उस मंदिर में दीपक जलाये

खुशियों के दीपक जलाये


जनकल्याण के भाव जगे

मन में अब सद्भाव जगे

अपनों की सब दूरी मिटाये

खुशियों के दीपक जलाये


लक्ष्मी संग पूजे श्री गणेश

मिट जाये संशय व क्लेश

तरक्की की राह अपनाये 

खुशियों के दीपक जलाये


छट जाये बादल तम के

मिट जाये संशय मन के

मन में ज्ञान दीप जलाये

खुशियों के दीपक जलाये


जीवन में बहार आ जाये

उपवन सुमन से महकाये

आओ ऐसा गुल खिलाये

खुशियों के दीपक जलाये



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract