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Shailaja Bhattad

Classics

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Shailaja Bhattad

Classics

खुशियाँ

खुशियाँ

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खोने के भय से न जीए इसे

दुख के भय से न खोए इसे।


हो जब रूबरू खुशियों से

तो जी भरकर जी ले इसे।


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