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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Romance Classics

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Romance Classics

खत जला ही सही मेरा दे दे !

खत जला ही सही मेरा दे दे !

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या ख़ुदा ! इतना हौसला दे दे।

इन अंधेरों में रास्ता दे दे।


मेरे ज़ख्मों पे रख कोई मरहम 

या कोई ज़ख्म ही नया दे दे।


हर तरफ तीरगी है बिखरी हुई

रौशनी का तो अब पता दे दे।


हर्फ़-दर-हर्फ़ है लहू दिल का

ख़त जला ही सही मिरा दे दे।


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