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Dr. Akshita Aggarwal

Tragedy

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Dr. Akshita Aggarwal

Tragedy

खोने का दर्द

खोने का दर्द

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अवगत तो नहीं मैं, 

किसी अपने को खोने के दर्द से। 

पर, डर जाता है मन। 

यह सोचकर भी कि, 

कैसा होता होगा, 

किसी अपने को खोने का दर्द?


वैसे तो ज़िंदगी में कभी-कभी, 

हर कदम पर मिलते हैं दर्द। 

पर, सबसे अधिक दुखदायी होता है।

शायद, किसी अपने को खोने का दर्द।


मेरे विचार से, 

एक कागज के पन्ने पर,

उतारा ही नहीं जा सकता। 

किसी अपने को खोने का दर्द। 

शब्दों में व्यक्त ही नहीं, 

किया जा सकता। 

मेरे विचार से,

किसी अपने को खोने की, 

भावनाओं का मंजर। 

मन की गहराइयों में, 

समाया होता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।


किसी अपने को खोने वाले को ही, 

पता होता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।

हर पल उनकी यादों में, 

जीने वाले को ही पता होता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।


देश की रक्षा के लिए गया बेटा।

पर,तिरंगे में लिपट कर आया। 

उसके माता-पिता से पूछो कि, 

क्या होता है? 

किसी अपने को खोने का दर्द।


जो रात-रात भर जागकर,

टपकाता है अपने आँसू। 

किसी अपने की तस्वीर, 

अपने हाथों में लिए। 

उस तस्वीर की सुरक्षा के लिए, 

उसके ऊपर लगे शीशे पर। 

सिर्फ़ वही जानता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।


सिर्फ़ दिल ही जानता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।

कोई और समझ ही नहीं सकता। 

किसी के मन में छिपा, 

किसी अपने को खोने का यह दर्द। 

सिर्फ़ दिलासा दे सकता है, 

कोई और कहकर कि, 

“समझ सकते हैं हम आपका दर्द”। 

सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है। 

किसी अपने को खोने का दर्द।


सिर्फ़ अपने ही जान सकते हैं। 

अपनों को खोने का दर्द। 

आजकल लोग जीते जी सहते हैं कभी-कभी, 

अपनों को खोने का दर्द।

नहीं आता कोई जाने वाला, 

वापस फिर लौटकर। 

कदर करना सीख लो।

रिश्तों की, अपनों की। 

जो जीते जी नहीं सहना चाहते। 

अपनों को खोने का दर्द। 

अपनों को खोने का दर्द।



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