निशा सैनी
Tragedy
जीना भूल गए
जब से तुम दूर गए
नज़र में नहीं जंचता कोई
हम कितने मजबूर हुए।
मोहब्बत
मेरी ज़िंदगी
सफर जारी है स...
हे प्रभु
एक सवाल
देशभक्ति का प...
मुद्दत से जान...
लम्हें ज़िन्द...
देवदास के नाम एक कविता...। देवदास के नाम एक कविता...।
कौन कहता है कि हमें कभी रोना नहीं है आता दिल हमारा भी है भावुक,बस दिखाना नहीं है आता कौन कहता है कि हमें कभी रोना नहीं है आता दिल हमारा भी है भावुक,बस दिखाना नह...
अवसर तलाशे संपूर्ण सेवाकाल बेजा फायदा खूब उल्लू बनाये अवसर तलाशे संपूर्ण सेवाकाल बेजा फायदा खूब उल्लू बनाये
और सूने अब खेल के मैदान हो गए हैं, घर अब घर कहाँ ? सूने मकान हो गए हैं। और सूने अब खेल के मैदान हो गए हैं, घर अब घर कहाँ ? सूने मकान हो गए हैं।
करूं मिन्नत, दुआ और फरियाद, रब अगले जन्म जने न मुझे नारी ! करूं मिन्नत, दुआ और फरियाद, रब अगले जन्म जने न मुझे नारी !
लोग लिख रहे हैं भूख पर और असमय काल के मुँह में समाती ज़िन्दगियों पर. लोग लिख रहे हैं भूख पर और असमय काल के मुँह में समाती ज़िन्दगियों पर.
तड़के-तड़के जगकर हमने सर्वप्रथम भोजन तैयार किया है, उसके पश्चात बाहरी दाव-पेंच के लिए तड़के-तड़के जगकर हमने सर्वप्रथम भोजन तैयार किया है, उसके पश्चात बाहरी दाव-...
अब बस भी करो यार, कब तक रहोगे झूठ पर सवार ? अब बस भी करो यार, कब तक रहोगे झूठ पर सवार ?
समझ लो नया दौर आएगा, बाकी और कुछ नहीं। समझ लो नया दौर आएगा, बाकी और कुछ नहीं।
कैसे रोऊँ मैं तो पुरूष हूँ न रोने का अधिकार नहीं है। कैसे रोऊँ मैं तो पुरूष हूँ न रोने का अधिकार नहीं है।
कैसी विडंबना है मेरी किस्मत में किस कारण में यहाँ आई हूँ ? कैसी विडंबना है मेरी किस्मत में किस कारण में यहाँ आई हूँ ?
कन्या भ्रूण हत्या सिर्फ अजन्मी बच्ची की हत्या नहीं, एक पूरे समाज की हत्या है कन्या भ्रूण हत्या सिर्फ अजन्मी बच्ची की हत्या नहीं, एक पूरे समाज की हत्या है
ये कहानी है होनहार की,जो रैगिंग की आग के भेंट चढ़ गया। ये कहानी है होनहार की,जो रैगिंग की आग के भेंट चढ़ गया।
तड़प का एक ज्वालामुखी सा समुन्दर मेरे भीतर भी बहता है तड़प का एक ज्वालामुखी सा समुन्दर मेरे भीतर भी बहता है
अमीरों की जो नीति है उसकी नींव ही फरेब है सिर्फ इसी कारण से तो गरीबों की फटी जेब है। अमीरों की जो नीति है उसकी नींव ही फरेब है सिर्फ इसी कारण से तो गरीबों की फटी ...
हजार नाकामिया मिली हो, पर लाख अनुभव के साथ ज़िन्दगी को मज़े से जीते, मैंने देखा है। हजार नाकामिया मिली हो, पर लाख अनुभव के साथ ज़िन्दगी को मज़े से जीते, मैंने देखा है...
पर अरसों से वो शाम धरे है, इसलिए कबाड़ में पड़े हैं ! पर अरसों से वो शाम धरे है, इसलिए कबाड़ में पड़े हैं !
तो विकास के झूठे पुलिंदों को बांध मन बहलाते हैं, तो विकास के झूठे पुलिंदों को बांध मन बहलाते हैं,
कौन बाँट सकता है भला किसी के गम को दर्द अपना है, तो तकलीफ़ भी अपनी ही होगी " कौन बाँट सकता है भला किसी के गम को दर्द अपना है, तो तकलीफ़ भी अपनी ही होगी "
टेलीविजन पर यह प्रसारण नहीं हुआ अख़बारों पर भी यह लिखा नहीं गया जंगल इलाके की। . टेलीविजन पर यह प्रसारण नहीं हुआ अख़बारों पर भी यह लिखा नहीं गया ज...