STORYMIRROR

Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract Inspirational Others

4  

Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract Inspirational Others

खलिश

खलिश

1 min
234

आंखों की पलकें नम हो गईं हैं

बातों के सिलसिले कम हो गए हैं

वक्त कुछ थम सा गया है 

खुशियों के लम्हे कम हो गए हैं


ना वक्त कभी ठहरा है 

ना खुशियाँ कम हुई हैं

दिल छोटा न कर

ये तकाज़ा उम्र का है

ये दायरा खलिश का है

 

माज़ी को याद कर 

मायूस ना हो

आंखें नम न कर

जिंदगी के सफर में 

एक ज़माना गुज़र गया है

हर उम्रदराज में 

यही सिलसिला है


न हो गर गुफ्तगू के लिए कोई पास

अपनी ही आवाज बुलंद कर

अपने से ही बात कर लिया कर


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract