STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Tragedy Inspirational

4  

Surendra kumar singh

Tragedy Inspirational

खबरों का मौसम

खबरों का मौसम

1 min
199

खबरों के मौसम में

अजीब सी बेचैनी है

अजीब सी अनिश्चितता है

अजीब सा भय है

केंद्र में है कॅरोना

एक वायरस।

वायरस की लहर से

सहमा सहमा इंसान

चलो अकेले ही

कॅरोना को हराते हैं

जीने का अंदाज बदलते हैं

यूँ ही दूर दूर रहते हुये

आपस में बात करते हैं

एक दूसरे के काम आते हैं

जीवन की जरूरतों को

और सीमित करते हैं।

जरूरत थी हमारे होने की

और हमने अपने को भीड़ में

बदल दिया था

धन्यबाद दें कॅरोना को

उसने हमें हमारे होने का

सन्देश दिया है

और हम अकेले ही 

उसके ही दिये हुये सन्देश के 

हथियार के साथ

जीने का नया निजाम

बना सकते हैं।

खबरों का मौसम

बदल सकते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy