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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

खौफ वाला मंज़र

खौफ वाला मंज़र

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ख़ून से तरबतर हुई थी यहां कई सिरमौर की पाग,

किसी को कैसे मुंह दिखाएं कैसा मनोरंजन है आज!

गमों के मेले लगे फिर भी गाया सबने खुशियों का रंगराज़ ,

भरी महफ़िल में अब भी लूटी जाती ललनाओं की लाज!


देश के हृदय के पन्नों पर रह गया ये मुझ पे सदा दाग,

स्वतंत्रता मिलने के बाद भी मानसिकता नहीं हुई आजाद!

अंग्रेजों के आने के बाद ही के दिन से देश का फूटा भाग,

आंचल में भारतमाता फना हो गए माता पिता के चराग़!


उजडा सा लालनाओं के मांग को भरने वाला सुहाग!  

तुम ही बताओ ऐसे में भला अब कोई कैसे खेले फाग !

किसको सुनाएं अब उस खौफ के मंज़र वाला राग।

बहुत हो चुका सुनो पुकार,अब तो सब जाओ जाग !


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