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Ervivek kumar Maurya

Romance


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Ervivek kumar Maurya

Romance


कहाँ खो गए हो तुम

कहाँ खो गए हो तुम

1 min 16 1 min 16

कहाँ खो गए हो तुम

मेरी सुध लेते नहीं

क्या जुदा हो गए हो तुम

जो बात करते नहीं

बिन तेरे मेरा पल गुजरता नहीं

क्यों ऐसे हो गए हो तुम

जो मुझसे प्यार करते नहीं

मुझसे तू रूबरू है रही

मेरी आँखों की नमीं से वाकिफ़ हो तुम

क्यों जमाने में अकेला किया

लगता है मुझसे दूर हो गए हो तुम

जाने अनजाने में छोड़ा क्यों

लग रहा है मेरी कद्र करते नहीं

कहाँ खो ..............

मैं तेरी कहानी हूँ लिखता

तेरी जवानी को हूँ पढ़ता

लिखने को अपने को बंद क्यों है किया

लगता है श्वेत स्याही से बन गए हो तुम

लिख दिये हैं फिर भी कई गीत तुझपे

शायद उनको कभी पढ़ते नहीं

कहाँ खो गए..........

मुझे जब वो समझ लें बेहतरी से

तब मेरे होने का आगाज कर दें

मैं उन्हें चाहूँगा बेहतरी से

हम चाहेंगे एक प्यार का अंजाम दें

क्यों वो घबराते हैं इश्क की राहों में

कुछ होने नहीं दूँगा ,क्यों मेरे साथ चलते नहीं

कहाँ खो गए...........


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