STORYMIRROR

Neerja Sharma

Tragedy

3  

Neerja Sharma

Tragedy

खामोशी

खामोशी

1 min
102

खामोशी मेरी

अगर तुम पढ़ लेते

तो शायद

मैं कभी खामोश ही ना होती, 

अपनी बात 

जो कह ना पाई

अपनी खामोशी 

मन ही मन में बसाई ,

यह खामोश रहना 

नहीं था इतना आसान 

मुझे था .....

बस यही इंतजार 

शायद ......

तुम पढ़ लो मेरी खामोशी !~



இந்த உள்ளடக்கத்தை மதிப்பிடவும்
உள்நுழை

Similar hindi poem from Tragedy