Chandra prabha Kumar
Fantasy
कैसे कोई काम करे
बाहर बरसात
भीतर भरा दिल है
कैसे कोई काम करे।
रिम झिम
टप टप
अविराम गति
मन से यह होड़ करे
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
मेरे मंदिर ना जाकर मस्जिद जाने से क्या होगा? क्या भगवान और अल्लाह में लड़ाई होगी? मेरे मंदिर ना जाकर मस्जिद जाने से क्या होगा? क्या भगवान और अल्लाह में लड़ाई होगी...
आज फिर मैंने कुछ ठान लिया, कुछ लोगों को याद किया, आज फिर मैंने कुछ ठान लिया, कुछ लोगों को याद किया,
करती है विडियो कालिंग और मुस्कुराती है मिलने की आस दिल में वो ऐसे जगाती हैं करती है विडियो कालिंग और मुस्कुराती है मिलने की आस दिल में वो ऐसे जगाती हैं
हक़ीक़त में अब शिकारियों ने अंदाज़ ही नहीं बल्कि अपने हथियार भी बदल दिये हैं। हक़ीक़त में अब शिकारियों ने अंदाज़ ही नहीं बल्कि अपने हथियार भी बदल दिये हैं।
हर बुलंद सफर का कभी तो विश्राम तय है। हर बुलंद सफर का कभी तो विश्राम तय है।
मैं फिर भी सोचता हूं, आखिर मै क्यों तुम्हे ख्यालों से लिखता हूं, सच बताना, क्या तुम्हे मैं फिर भी सोचता हूं, आखिर मै क्यों तुम्हे ख्यालों से लिखता हूं, सच बताना, क्...
देखो मैं मर रहा हूँ यहाँ, तुम बचा लोगी क्या ? देखो मैं मर रहा हूँ यहाँ, तुम बचा लोगी क्या ?
हॉलीवुड और नेटफ्लिक्स के ज़माने में राजा रानी के किस्सों पर यकीन रखने वाला एक राजकुमार हॉलीवुड और नेटफ्लिक्स के ज़माने में राजा रानी के किस्सों पर यकीन रखने वाला ...
मकर संक्रांति में गंगा उस पार से मेरे साथ में पतंग का पेंच लड़ाओगे? मकर संक्रांति में गंगा उस पार से मेरे साथ में पतंग का पेंच लड़ाओगे?
वो भर दो ना, "शकुन" फासले जो दरमियाँ हैं, कुछ कम कर दो ना। वो भर दो ना, "शकुन" फासले जो दरमियाँ हैं, कुछ कम कर दो ना।
जो कुछ उलझे-बिखरे, फटे पन्नों से दिखते हैं उन्हें यादों की गठरी में बांध रख देती हूँ जो कुछ उलझे-बिखरे, फटे पन्नों से दिखते हैं उन्हें यादों की गठरी में बा...
जैसे हो वैसे ही रहना बदलना नहीं कितना भी कुछ हो जाए भूल मत जाना कहीं। जैसे हो वैसे ही रहना बदलना नहीं कितना भी कुछ हो जाए भूल मत जाना कहीं।
वही मुस्कान उस दीनदयाल की प्रभु मुस्कान कहलाती है। वही मुस्कान उस दीनदयाल की प्रभु मुस्कान कहलाती है।
साझा करने आयी मुझसे रातों की अकेली आज निशा।। साझा करने आयी मुझसे रातों की अकेली आज निशा।।
तो क्या होगा ? कुछ नहीं और रह जायेगा केवल एक शून्य। तो क्या होगा ? कुछ नहीं और रह जायेगा केवल एक शून्य।
मेरे दिन की शुरुआत करती तुम और वो चाय का प्याला। मेरे दिन की शुरुआत करती तुम और वो चाय का प्याला।
एक दूसरे के साथ बनारस की गलियों में घूमना बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन को एक दूसरे के साथ बनारस की गलियों में घूमना बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के ...
एक सुंदर रिश्ता हम दोनों के बीच फिर इन भावनाओं से बन जाती है एक सुंदर रिश्ता हम दोनों के बीच फिर इन भावनाओं से बन जाती है
किसी से न कह पाएं, वो बस खुद से कह कर खुश हो जाती हैं। किसी से न कह पाएं, वो बस खुद से कह कर खुश हो जाती हैं।
उपन्यास, कविता, चित्र और एक्टिंग के माध्यम से ! उपन्यास, कविता, चित्र और एक्टिंग के माध्यम से !