Chandra prabha Kumar
Fantasy
कैसे कोई काम करे
बाहर बरसात
भीतर भरा दिल है
कैसे कोई काम करे।
रिम झिम
टप टप
अविराम गति
मन से यह होड़ करे
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
बहुत मन होगा फुर्सत में किसी के कांधे पे सिर रख के रोने का बहुत मन होगा फुर्सत में किसी के कांधे पे सिर रख के रोने का
कितने दर्द मिले हैं समझ में आता है आज उनके होने में मायूसी में मासूम बनकर बैठे हैं कितने दर्द मिले हैं समझ में आता है आज उनके होने में मायूसी में मासूम...
ना जाने कब तेरी गली, तेरे कूचे से गुजर जाते हैं… ना जाने कब तेरी गली, तेरे कूचे से गुजर जाते हैं…
दूरियों के ख्यालों से डरे दिल मेरा धड़कने भी मेरी कुछ सहमी है.. दूरियों के ख्यालों से डरे दिल मेरा धड़कने भी मेरी कुछ सहमी है..
इरादा टूट जाता है कसक उठती है दिल में, जब, कभी मायूस गलियों से कोई हसरत गुजरती है । इरादा टूट जाता है कसक उठती है दिल में, जब, कभी मायूस गलियों से कोई हसरत गुजरत...
उसके चीरहरण का बन रहे थे गवाह कई उसके चीरहरण का बन रहे थे गवाह कई
नैन में कजरा लगाया बादलों की ओट से नैन में कजरा लगाया बादलों की ओट से
कितनी उम्मीदें, आशाएं सजाया था उसके साथ, कितनी उम्मीदें, आशाएं सजाया था उसके साथ,
कभी होता आँसुओं का जिक्र तो कभी खुशियों से भी मिल लेती हूँ ! कभी होता आँसुओं का जिक्र तो कभी खुशियों से भी मिल लेती हूँ !
न मारो नारी को वरना क्या होंगे राखी के मायने न मारो नारी को वरना क्या होंगे राखी के मायने
हर इक मुखड़े को अपनी दिलरुबा का मुख समझता है। हर इक मुखड़े को अपनी दिलरुबा का मुख समझता है।
सो रहा था जीवन सारा जब निकले कान्हा मथुरा की गलियारों से सो रहा था जीवन सारा जब निकले कान्हा मथुरा की गलियारों से
हैं बड़े नादान ऐसी आँखों के मासूम सपने क़ैद में है ज़िन्दगी फिर भी सफ़र हम देखते हैं हैं बड़े नादान ऐसी आँखों के मासूम सपने क़ैद में है ज़िन्दगी फिर भी सफ़र हम देखते ...
लगता है उसे मेरे शौक पसंद है तभी हर रोज़ मज़ा देने आता है लगता है उसे मेरे शौक पसंद है तभी हर रोज़ मज़ा देने आता है
कब तलक दिल ही दिल मे रोयेगा काश इस दर्द को जुबान मिले। कब तलक दिल ही दिल मे रोयेगा काश इस दर्द को जुबान मिले।
महसूस भी ना हो दिल को ऐसी कशमकश में पिघल रहा है महसूस भी ना हो दिल को ऐसी कशमकश में पिघल रहा है
जिंदगी कदम दर कदम, लेती है हिसाब वफ़ा का जिंदगी कदम दर कदम, लेती है हिसाब वफ़ा का
लेखनी चली लेखनी रुकी गति थमी वह आए ? लेखनी चली लेखनी रुकी गति थमी वह आए ?
कहने हैं सब तुमसे, सौंपने हैं तुम्हें.. वो नर्म-गर्म अहसास.. कहने हैं सब तुमसे, सौंपने हैं तुम्हें.. वो नर्म-गर्म अहसास..
क्या सुनाया चाँदनी ने, और क्या है अनकही। क्या सुनाया चाँदनी ने, और क्या है अनकही।