कैसे कहूं पिया की बतियाँ
कैसे कहूं पिया की बतियाँ
कैसे कहूं पिया की अपनी बतियाँ
लाज छुपाऊँ, शर्म आवे ऐ सखियाँ
अखियाँ छुपाऊ, नज़रे चुराउ ऐ सखियाँ
दिल का हाल बेक़रार है ऐ सखियाँ
मिलने को तरसे मुझें सारी सखियाँ
पूछने को बेताब हैं सारी बतियाँ
कैसे बताऊ मन की बातें ऐ सखियाँ
दिल का हाल बेक़रार है ऐ सखियाँ
ना पूछ अब कुछ भी सखियाँ
नज़रों के इशारे भी खुशहाल है
दिल मेरा अब बाग़ बाग़ है
उनसे मिलन की रात में
कैसे कहूं पिया की बतियाँ।

