कैसा होता है
कैसा होता है
मेरे दर्द से बेखबर तेरी आंखें
कैसे जान सकेंगी
नम पलकों से मुस्कुराना कैसा होता है
आंसू से भीगे तकिये पर
ख़ामोशी से सो जाना कैसा होता है
अपने हाथों से अपनी खुशियों का
गला घोंटना कैसा होता है
अपने स्वाभीमान की समाधि पर
वफादारी की श्रद्धांजलि देना कैसा होता है
दुनिया के सामने चुप रेह कर
मोहब्बत का भरम रखना कैसा होता है
मेरी आंखों से बेखबर तेरी नज़रें
कैसे जान सकेंगी
रेत के टीलों से लेहरों के आगे
सपनों का घर बनाना कैसा होता है
टुटे हुए ख्वाबों की कुरचियां
पलकों से समेटना कैसा होता है
पहली मुलाकात को किसी हादसे की तरह
भुल जाना कैसा होता है
मेरी आहट से बेखबर तेरी ज़िन्दगी
कैसे जान सकेंगी
किसी को दिल की गहराइयों से
चाहना कैसा होता है
मोहब्बत करके पूरी शिद्दत से
मोहब्बत निभाना कैसा होता है
इश्क में बिन मरे मौत की हद तक
टूट कर चाहना कैसा होता है
किसी सूखे पत्ते की तरह
पल पल में बिखर जाना कैसा होता है
तुम अपनी जिंदगी में मगन
हर बात से बेखबर कैसे जान सकोगे
किसी को चाहना क्या होता है
खुदा से दुआओं में किसी को मांगना क्या होता है
मोहब्बत क्या होती है
जिंदगी भर याद रखना कैसा होता है।

