STORYMIRROR

Syeda Noorjahan

Romance

4  

Syeda Noorjahan

Romance

कैसा होता है

कैसा होता है

1 min
340

मेरे दर्द से बेखबर तेरी आंखें

कैसे जान सकेंगी

नम पलकों से मुस्कुराना कैसा होता है

आंसू से भीगे तकिये पर

ख़ामोशी से सो जाना कैसा होता है

अपने हाथों से अपनी खुशियों का

गला घोंटना कैसा होता है

अपने स्वाभीमान की समाधि पर

वफादारी की श्रद्धांजलि देना कैसा होता है

दुनिया के सामने चुप रेह कर

मोहब्बत का भरम रखना कैसा होता है

मेरी आंखों से बेखबर तेरी नज़रें

कैसे जान सकेंगी

रेत के टीलों से लेहरों के आगे

सपनों का घर बनाना कैसा होता है

टुटे हुए ख्वाबों की कुरचियां

पलकों से समेटना कैसा होता है

पहली मुलाकात को किसी हादसे की तरह

भुल जाना कैसा होता है

मेरी आहट से बेखबर तेरी ज़िन्दगी

कैसे जान सकेंगी

किसी को दिल की गहराइयों से

चाहना कैसा होता है

मोहब्बत करके पूरी शिद्दत से

मोहब्बत निभाना कैसा होता है

इश्क में बिन मरे मौत की हद तक

टूट कर चाहना कैसा होता है

किसी सूखे पत्ते की तरह

पल पल में बिखर जाना कैसा होता है

तुम अपनी जिंदगी में मगन

हर बात से बेखबर कैसे जान सकोगे

किसी को चाहना क्या होता है

खुदा से दुआओं में किसी को मांगना क्या होता है

मोहब्बत क्या होती है

जिंदगी भर याद रखना कैसा होता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance