काश !ऐसा हो जाये
काश !ऐसा हो जाये
काश !ऐसा हो जाये
मैं फिर से छोटी बच्ची बन जाऊँ
सारी दुनिया से बेखबर मैं
हर पल तितली सी खिलखिलाऊँ
सब मेरे रोने से डर जाएँ
मेरी ख़ुशी के लिए दौड़ लगाए
प्यारा बचपन फिर से पाऊँ
पल में गुस्सा ,पल में मुस्कराऊं
बाहें फैलाये दौड़ती आऊं
और तुमसे लिपट जाऊँ
काश ऐसा हो जाये
ना पढाई की फ़िक्र
ना रिश्तों झिक-झिक
बस ख्याली दुनिया में खो जाऊँ
टिम -टिम करती पलकें झपकाऊँ
बिल्ली और चूहे को दोस्त बनाऊं
प्यारा बचपन फिर से पाऊं
फिर से एक बचपन जी जाऊँ
