STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Romance

4  

Kanchan Prabha

Romance

काँच का बसंत

काँच का बसंत

1 min
384

इस मौसम का पीलापन

कुछ याद दिलाता है।

इस वीरानी गलियों में

किसी की सांसे फंसी हुई है।

इस हवा के झोंके में सुगंध है किसी की

इस धूल भरे सड़कों पर

किसी के पद चिन्ह निहित है

और इंतजार है मुझे कि शायद वो आ जाए

किसी छण

मैं छत की सीढ़ियों पर खड़ी खड़ी

कुछ सोच रही हूं और मुझे

याद आता जा रहा है,

इस मौसम का अतीत

और चुभता जा रहा है,

मन के धरातल पर यह

कांच का बसंत ! 


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

Similar hindi poem from Romance