जो इंसान स्वभाववश कामचोर और आलसी हो,
उसका पतन तो निश्चित है!
जो इंसान किसी भी बहाने से
अपने निर्धारित काम से
जी चुराता फिरता है,
वो अपने कार्यस्थान के साथ-साथ
अपने परिवार एवं स्वयं की भी
अवनति का रास्ता प्रशस्त देता है।
एक कामचोर और आलसी व्यक्ति
ये सोचता है
कि उसे कौन पकड़ पाएगा!
मगर वो गलत सोचता है,
क्योंकि ज़ाहिर-सी बात है
कि बिना उचित कर्म के
इस संसार में मनुष्य का
कोई अस्तित्व नहीं रहता।
और एक दिन ऐसा आयेगा
कि उस कामचोर और आलसी व्यक्ति को
ये एहसास हो ही जाएगा
कि वो इस प्रतिस्पर्धामूलक विश्व में
कितना पीछे रह गया है!
इसीलिए बिना आलस्य के
सत्कर्म कीजिए और राष्ट्रनिर्माण में
अपना बहुमूल्य योगदान दीजिए