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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Action

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Action

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कुछ खुदगर्ज दुनियावाले
अपनी 'दकियानुसी' सोच पे 'अड़े' रहे
कि 'उसे' इतनी 'तकलीफ़' देते जाओ...
इतनी तकलीफ़ 'देते जाओ'
कि वो 'आख़िर'
थकहार कर अपने हिम्मत का
'हथियार' ही डाल दे...

मगर उनको क्या मालूम
कि वो 'इंसान'
ज़िन्दगी की 'जद्दोजहद' में
'पल-पल' पिसते हुए
असली- नक़ली चेहरों से
'वाकिफ' हो ही गया...

अरे, आज वो
सीधा- सादा, 'भोला-भाला' इंसान
खुद एक 'फौलाद' बन गया,
जिसे तोड़ पाना
मुश्किल ही नहीं,
'नामुमकिन' है !!!
और यक़ीनन
उस शख़्स की
'मक़सद' का 'अंदाज़ा'
लगा पाना
नामुमकिन है।


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