आडंबर त्यागो : सत्य को अपनाओ...
आडंबर त्यागो : सत्य को अपनाओ...
हे पापी मनुष्य ! तुम केवल झूठे वादों
और छल-कपट भरे इरादों के बलबूते पर
अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो सकते...!!!
हे पापी मनुष्य ! तुम अपनी दिशाहीन ज़िन्दगी की
भ्रष्ट संगत से मुक्त हो
और स्वयं को भारतीय संस्कृति से
जोड़कर तो देखो...!!!
क्या नहीं है स्वदेश में,
जो तुम यूं बदहवास होकर
अर्धनग्न पश्चिमी संस्कृति के स्पर्श में अपनी
वैचारिक पहचान को भी लूटा देने पर अमादा हो...!!!
हे पापी मनुष्य ! आखिर क्या तलाश है तुम्हें,
जो तुम भारत की हरेक मुद्दे पर
देशविरोधी गतिविधियों में
गुटबाजी करते फिर रहे हो...???
क्यों ये हास्याभिनय कर रहे हो...?
क्या तुम्हें लगता है कि भीड़ तुम्हारा
साथ देगी...??
अरे, जब उन्हें तुम्हारी
कूटनैतिक हथकंडों का पता चलेगा,
तब यही भीड़ तुमको
दौड़ा-दौड़ा कर मारेगी...!!!
और तुम कहीं भी छुपकर बैठने की
हालत में न रहोगे, हे पापी मनुष्य !
हे पापी मनुष्य ! इस देश की मिट्टी में
कदम रखते ही तुम
इसकी गरिमा को
अक्षुण्ण रखने को जिम्मेवार हो...
यह कभी न भूलना कि
भारत के बिना
तुम्हारी कोई पहचान नहीं,
तुम्हारी कोई विसात ही नहीं...।
