पहचान
पहचान
जब हमारा देश
अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से
ग्रसित, निष्पेषित एवं पीड़ित था,
तब उस 'ब्रिटिश राज' में
इंसान का परिचय
उसके पहने हुए कपड़ों और
जूतों से होती थी...
मगर आज
हमारा देश आज़ाद है,
सो इंसान अपनी
सकारात्मक वैचारिक क्रांति से भी
अपनी एक अलग पहचान
बना सकता है,
न कि केवल
चमकदार जूतों एवं कपड़ों से
तथाकथित 'उच्च मापदंड' की
पराकाष्ठा पर अनुकूलित होने में...!
