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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

ज्ञान की ज्योति जलाओ

ज्ञान की ज्योति जलाओ

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दीप जला कर हर घर-आंगन, पसरा-तमस मिटाओ ll अन्तर्मन की मिटे कालिमा , ज्ञान की ज्योति जलाओ ll

ये माटी के दिये-खिलौने, कितने मोहक लगते हैं ll भाव सुमंगल धर्म-कर्म के, जीवन में गति भरते हैं ll

द्वन्द्व-द्वेष से मुक्त सभी हों, चलें हाथ में हाथ लिए- मन के स्वप्न-सुकोमल पूरे, नव विकास-पथ बढ़ते हैं ll

अहंकार फुफकार रहा नित , बढ़कर शमन कराओ ।lअन्तर्मन की मिटे कालिमा, ज्ञान की ज्योति जलाओ ।1।

यह पर्व सुपावन संकल्पों का, कुछ तो मन से ठानो, मानवता की जीत सुनिश्चित, होगी निश्चित मानो ll

पावन रिश्तों के ऑगन में, कोई न दीवार बने-, स्नेह, दया, सहकार बॉटना, धर्म सभी का जानो ll

श्रम की धर्म-ध्वजा लेकर के, सो रहा विश्व जगाओ ll अन्तर्मन की मिटे कालिमा, ज्ञान की ज्योति जलाओ ।2।

निर्विघ्न मिले समृद्घि सबको, सब यश-वैभव सम्पन्न रहें ll श्री-गणेश से करें निवेदन, न कोई कहीं विपन्न रहें ll

निर्मल भाव-प्रसून खिलें, हो सुरभित जग यह सारा-राष्ट्र-धर्म की गंग-जमुन से, जन-जन मन आछन्न रहें ll

अधरों पर हों गीत विजय के, मिल-जुल खुशी मनाओ ll अन्तर्मन की मिटे कालिमा, ज्ञान की ज्योति जलाओ ।3।


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