STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

जंगल में एक शव

जंगल में एक शव

1 min
223

जंगल में शव मिलने से बड़ी सनसनी थी 

लिबरल्स की भौंहें इससे बड़ी तनी तनी सी थी 

सभी न्यूज चैनल्स भांय भांय चिल्ला रहे थे 

कभी सरकार पर कभी सभ्यता पर गुर्रा रहे थे 

सारे अखबारों में यह घटना प्रथम पन्ने पर छपी थी 

सारे पर्यावरणविदों की सांस इस घटना से जमीं सी थी 

महज एक शव मिलने से जैसे भूचाल आ गया था 

धरने प्रदर्शन सभाओं से लोगों में उबाल आ गया था 

रोज सैकड़ों इंसानों के शव मिलते हैं , वे खबर नहीं बनते 

एक बाघ के शव की बराबरी सैकड़ों इंसानी शव नहीं करते 

किसी की लाश सूटकेस में पाई जाती है तब भी नहीं 

कोई बालिका झाड़ियों में सड़ी मिलती है तब भी नहीं 

न जाने कितने इंसान रोज ही मारे जा रहे हैं 

लेकिन वे अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पा रहे हैं 

आज इंसान की जान बहुत सस्ती है , यूं ही मर रहा है 

एक जानवर की जान ज्यादा कीमती है, ऐसा लग रहा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy