STORYMIRROR

Pradeep Rajput "Charaag"

Abstract

4  

Pradeep Rajput "Charaag"

Abstract

जला दे चराग़

जला दे चराग़

1 min
485

दिलकी बस्ती को यूँ ज़लादे चराग़,

अंधियारा  घना हटादे चराग़।


रौशनी से ये घर जला तो न दोगे,

क्या निभाओगे अपने वादे चराग़।


साथ यूँ ही मिरे जन्म भर रहोगे,

अब न छोडोगे ये बतादे चराग़।


कितने फिरते मुझे बनाने अपना,

मर मिटी तुझपे अब पतादे चराग़।


मैं हसीँ ये कहा किये लोग मुझसे,

है यकी ये ज़रा बता दे चराग़।


गुम कहाँ रहते हो यूँ खामोशी में,

मुझसे क्या हैं बता इरादे चराग।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract