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Shailaja Bhattad

Romance

3  

Shailaja Bhattad

Romance

जज्बात

जज्बात

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तेरी कलम की स्याही बन। 

तेरे खयालों को उकेरती हूं ।

हां, तेरे जज्बातों में ही तो रहती हूं।

मेरे सिरहाने कभी मेरे खयाल, तो कभी मेरे दर्द जगते हैं। 

रात भर ये मेरी, करवटों में पलते हैं।


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