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Sachin Gupta

Romance Tragedy

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Sachin Gupta

Romance Tragedy

जिन्दगी की तड़प

जिन्दगी की तड़प

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जिन्दगी की तड़प


जिन्दगी ने अब, बहुत सी फुरसत से,

दी है मौत को आवाज।

की अब और न तड़पा मुझे,मिलन के विरह से,

बस अब ले चल मुझे तू अपने साथ,

अपने नगर को.

 

अब मुनकीन नहीं है, दर्द सहना जुदाई का,

ले चल मुझे तू अपने साथ ।

 

कि सांसों ने अब साथ चलना छोड़ दिया है ,

दिल ने अब धड़कना छोड़ दिया है ,

भरोसा रहा नहीं अब इस तन पे,

बस ले चल मुझे तू अपने साथ ,

अपने शहर को ।

 

अब और नहीं सुनना मुझे बहाना कोई,

थक चुकी हूँ मैं चलते-चलते, तेरे पीछे

लहू भी अब मेरा जमने को है,

साँसे भी अब रुकने को है ,

बस ले चल मुझे तू अपने साथ ,

अपने नगर को ।

 

बस ओर नहीं, अब और नहीं

मुमकीन है दर्द सहना तन्हाई का

सुन ले अब ,यह है गुजारिश मेरी,

की अब और न तड़पा मुझे,मिलन के विरह से

बस ले चल मुझे तू , बांहों में भर,

अपने साथ, ले चल मुझे तू अपने साथ

अपने शहर को ,अपने नगर को ।

ले चल मुझे तू अपने साथ



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