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Brijlala Rohanअन्वेषी

Abstract Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Abstract Inspirational

जिंदगी का सफर

जिंदगी का सफर

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जिंदगी का सफर सचमुच कितना सुहाना है ,

जिंदगी हर्ष- विषाद, प्रेम- घृणा ,व्यथा - वेदना ,मिलन - विरह ,

उल्लास- उमंग और जीने की सिर्फ उम्मीद का अफसाना है ।

यहाँ कोई सदा के लिए नहीं आया !

ये किराये का घर है साहब ! छोड़कर सबको ही एक दिन इसे जाना है ।

तो फिर भी अपने - पराये का भेद कैसा ? 

जब ईश्वर ने सबको एक ही हवा- पानी - मिट्टी- प्रकाश से बनाया , 

तो ये ऊँच- नीच का कहाँ से जिक्र आया ? 

जब सबका एक धरा ही ठिकाना है ।

जिंदगी का सफर सचमुच कितना सुहाना है ।

कोई जब शिद्दत से एक - दूसरे को चाहे भी तो     


ये तथाकथित सभ्य किंतु आचरण-भाव से भ्रष्ट लोगों को

टाँग बीच में अड़ाना है ! 

न जाने किसी कि खुशी को खुरदुरा करने में छुपी

कैसी इनकी मर्यादा और इज्जताना है??

हर कोई को हाथ खिंचने का चाहिए बस उनको एक बहाना है ! 

जिससे निज हित साधने हो सलूक उनसे मित्राना है !

काम सधते ही हम कहाँ ? तुम कहाँ ?

ये बेमेल मिलाप किसे अपनाना है?

मिलना तो महज संयोग था हमारा हमारी नीयत तो काम को

अंजाम तक सही- सलामत पहुँचाना था !

सफर हमारा यहीं तक था अब किसे यूं ही व्यर्थ में अपना बनाना है?

सचमुच जिंदगी का सफर कितना सुहाना है !

जिसने उँगली पकड़कर चलना सिखाया।


उम्र के पड़ाव में उनकी हिफ़ाज़त करने की जगह

उल्टे उन्हें ही चलने कि नसीहत सिखाना है! 

दूध का कर्ज भूल करके झूठी दरियादिली निभाना है !    

जिसको नीच -जाति, पिछड़ी का संज्ञा देते काम पड़ने पर

कीमत उनकी पवित्राना है ! 

ये कैसा रिश्ता है हमारे लिप्साओं का जिसमें

काम पड़ने पर ही मूल्य उनका चुकाना है ! 

काम सधने पर वो तो कुड़ा- करकट समाना है !

जिंदगी का सफर कितना सुहाना है ! 

हरेक प्रकार की तकलीफें सहते हुए भी मनुष्य को

जीने का चाहिए कोई न कोई बहाना है!!

 


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