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Anita Bhardwaj

Abstract

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Anita Bhardwaj

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ज़िंदा हूं मैं

ज़िंदा हूं मैं

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अतीत के जो पन्ने आपको

मरा हुए घोषित कर चुके,

उनकी बातों को ना मानकर जब कोई 

आ जाए आपके सामने, और कह दे 

जिंदा हो तुम।


जब उन जज्बातों से मुक्त जिंदा लाशों में से

कोई समझदार जज्बाती इंसान सामने आए

और कह दे 

ज़िंदा हो तुम।


दिल को यकीन ना आया,

और आंसू दिल की जमी बर्फ पिंघला गए

तो लगा हां ज़िंदा हूं मैं,

हां ! ज़िंदा हूं मैं।


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