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Anshu Shri Saxena

Romance

4  

Anshu Shri Saxena

Romance

जीवनसाथी

जीवनसाथी

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जिन्दगी की ग़ज़ल तुम्हारे साथ गुनगुनाऊँ मैं, 

कोई मीठी-सी धुन, यूँ ही तरन्नुम में गाऊँ मैं, 

कुछ ख़ामोशियाँ तुम कहो, कुछ निगाहों से सुनूँ मैं, 

ख़्वाब धड़कनों से तुम बुनो, कुछ सतरंगी से बुनूँ मैं| 


तुम हो साथ, तो आज़ाद, बेपरवाह-सी हूँ मैं, 

तुम ठहरे साहिल-से, अल्हड़-सी नादाँ मौज हूँ मैं, 

क़तरा-क़तरा गुज़रते वक़्त के साथ, होता है यूँ एहसास ; 

कुछ मुझ से हो गये हो तुम, और कुछ तुम-सी हो गई हूँ मैं|


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