Mistry Surendra Kumar
Tragedy Others
पढ़ते आए शास्त्र पुराणों में,
पहला सुख नीरोगी काया है ।।
यह जानते हुए भी ऐ मानव !
क्यों कुमार्ग पर भरमाया है ।।
मानव जीवन मिला बड़े यत्नों से,
इसको क्यों झुठलाया है ।।
छोड़ दुर्व्यसनों को आगे बढ़ ,
कर चरितार्थ उत्तम कर्म , यही तेरी माया है ।।
प्रकृति
मानवता
ग़रीब की व्यथा
कर्मवीर
बालक
आत्म साक्षात्...
पर्यावरण संरक...
नैतिकता
जीवन
संकल्प
अब हमनें धरा को पुनः बचाना है जो टूट चुकी हैं डालियाँ उन्हें फिर से सजाना है। अब हमनें धरा को पुनः बचाना है जो टूट चुकी हैं डालियाँ उन्हें फिर से सजाना ...
सब रो रहे हैं तड़प रहे कैसे संभला जाये। सब रो रहे हैं तड़प रहे कैसे संभला जाये।
रात ढल जाने के बाद बादियों में लौटना कैसा ? रात ढल जाने के बाद बादियों में लौटना कैसा ?
आओ मिलकर पेड़ लगाएं,ये जीवन का सार। जीवन में होगी अनुकूलता, चलता इससे संसार। आओ मिलकर पेड़ लगाएं,ये जीवन का सार। जीवन में होगी अनुकूलता, चलता इससे संसार।
जिंदगी एक शराब है 'कुमार खंदए—गुल को जाके देख लिया। जिंदगी एक शराब है 'कुमार खंदए—गुल को जाके देख लिया।
चाहे रोते रहे,सब नर-नारी, चुनाव की न रुकेगी तैयारी। चाहे रोते रहे,सब नर-नारी, चुनाव की न रुकेगी तैयारी।
कुछ पलों की साँसें रह गईं, क्या तुम मिलने आओगे ? कुछ पलों की साँसें रह गईं, क्या तुम मिलने आओगे ?
गर नेता जनसेवा धर्म को बनायेगा ह्रदय कोर है। गर नेता जनसेवा धर्म को बनायेगा ह्रदय कोर है।
हाँ, मैं साधारण सी बस इक तवायफ ही तो हूँ, उजले होते हुए भी कालिख में तुम्ही ने गिराया है, मग़र ये... हाँ, मैं साधारण सी बस इक तवायफ ही तो हूँ, उजले होते हुए भी कालिख में तुम्ही ने...
और आज खुद अपने आप समझ गई हूं मैं, संवर गई हूं मैं, क्या सोचा था तूने ? और आज खुद अपने आप समझ गई हूं मैं, संवर गई हूं मैं, क्या सोचा था तूने ?
कौन आया, गया कौन, सब है ये रिवाज़ हैं। रूह नित थी, है,होगी नित ये हिसाब हैं। कौन आया, गया कौन, सब है ये रिवाज़ हैं। रूह नित थी, है,होगी नित ये हिसाब हैं।
सफेद कोट शायद उसको इसलिए दिया। इस महामारी में मसीहा वो सबका बना।। सफेद कोट शायद उसको इसलिए दिया। इस महामारी में मसीहा वो सबका बना।।
पहले सोचे, समझे करे विचार ना हो किसी के नापाक इरादो का शिकार... पहले सोचे, समझे करे विचार ना हो किसी के नापाक इरादो का शिकार...
आदमी दफ़न हैं जिंदा, यहां दीवारों में।। अब तो बैचेन है "उल्लास" तेरी क्या ह आदमी दफ़न हैं जिंदा, यहां दीवारों में।। अब तो बैचेन है "उल्लास" ते...
जी हां इसीलिए ये समस्या बहुत बड़ी है निश्चित ही ये संकट की घड़ी है जी हां इसीलिए ये समस्या बहुत बड़ी है निश्चित ही ये संकट की घड़ी है
हुई बेबस दुनिया सारी, मायूसी फैली छाई लाचारी । हुई बेबस दुनिया सारी, मायूसी फैली छाई लाचारी ।
'मैं' के घर में तो अना की पैदाइश होती है। 'मैं' के घर में तो अना की पैदाइश होती है।
थोड़े पानी से नहालो, याद रखो ये बोल। थोड़े पानी से नहालो, याद रखो ये बोल।
फिर कहते हैं अचानक दूर हो गए, बो दो पंछी जो रेहेते थे साथ । फिर कहते हैं अचानक दूर हो गए, बो दो पंछी जो रेहेते थे साथ ।
‘साथ-साथ अस्तित्व है, तरु हो चाहे जीव’ वेदों का सच मानिए, परम सनातन ज्ञान। ‘साथ-साथ अस्तित्व है, तरु हो चाहे जीव’ वेदों का सच मानिए, परम सनातन ज्ञान।