Mistry Surendra Kumar
Tragedy Others
पढ़ते आए शास्त्र पुराणों में,
पहला सुख नीरोगी काया है ।।
यह जानते हुए भी ऐ मानव !
क्यों कुमार्ग पर भरमाया है ।।
मानव जीवन मिला बड़े यत्नों से,
इसको क्यों झुठलाया है ।।
छोड़ दुर्व्यसनों को आगे बढ़ ,
कर चरितार्थ उत्तम कर्म , यही तेरी माया है ।।
प्रकृति
मानवता
ग़रीब की व्यथा
कर्मवीर
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आत्म साक्षात्...
पर्यावरण संरक...
नैतिकता
जीवन
संकल्प
कभी कभी सोचता हूं काश! नासमझ ही होता। कभी कभी सोचता हूं काश! नासमझ ही होता।
आज यह जिंदगी उद्योग की भट्टी हो गई पथरा गया इंसा जिंदगी धुआँ-धुआँ हो गई। आज यह जिंदगी उद्योग की भट्टी हो गई पथरा गया इंसा जिंदगी धुआँ-धुआँ हो गई।
मुहब्बत की दुकान में नफरती सामान धड़ल्ले से बिक रहा। मुहब्बत की दुकान में नफरती सामान धड़ल्ले से बिक रहा।
कैसी है ये बेबसी कैसी ये लाचारी है भूख से दुनिया हारी है। कैसी है ये बेबसी कैसी ये लाचारी है भूख से दुनिया हारी है।
क्यों हम उतर पाए न खरे एक दूजे की कसौटी पर। क्यों हम उतर पाए न खरे एक दूजे की कसौटी पर।
यह रात यह तन्हाई, और याद तेरी, ना सोने देती हैं, और ना जगने देती हैं। यह रात यह तन्हाई, और याद तेरी, ना सोने देती हैं, और ना जगने देती हैं।
अक्सर जिंदगी छीन लेती है उन हौंसले के पंख। अक्सर जिंदगी छीन लेती है उन हौंसले के पंख।
मीत मेरे बचपन के न जाने कहां खो गए छोड़ गांव की गलियां शहर की भीड़ का हिस्सा हो गए। मीत मेरे बचपन के न जाने कहां खो गए छोड़ गांव की गलियां शहर की भीड़ का हिस...
एक छोटा सा मोबाइल आज रिश्तों पे पड़ रहा भारी। एक छोटा सा मोबाइल आज रिश्तों पे पड़ रहा भारी।
जिम्मेदारी दो जिन्हें गोश्त की रखवाली की हों वही गिद्धों के सरदार तो फिर क्या होगा जिम्मेदारी दो जिन्हें गोश्त की रखवाली की हों वही गिद्धों के सरदार तो फिर क्या...
नहीं,नहीं-चीख नासूर की नहीं मेरी ही है.. नहीं,नहीं-चीख नासूर की नहीं मेरी ही है..
बस जी रहे है, पीड़ा के साथ जैसे निकल रही हो अर्थी की बारात. बस जी रहे है, पीड़ा के साथ जैसे निकल रही हो अर्थी की बारात.
क्या मुझे अधिकार नहीं सुंदर, वांछित जीवन जीने का ? क्या मुझे अधिकार नहीं सुंदर, वांछित जीवन जीने का ?
छीने तुझसे सारी तेरी प्यारी सारी चीजें। छीने तुझसे सारी तेरी प्यारी सारी चीजें।
दुःखों से जीवन का जीवंत अनुभव लीजिए दुःखों से जीवन का जीवंत अनुभव लीजिए
अपनी किस्मत नहीं मुझको इतनी हसीन लगती है । अपनी किस्मत नहीं मुझको इतनी हसीन लगती है ।
मनाकर एक दिवस केवल, शेष दिन हम जो सो जाएंगे। मनाकर एक दिवस केवल, शेष दिन हम जो सो जाएंगे।
बेवफाई तुमने की या मैंने की ये रब जानता है। बेवफाई तुमने की या मैंने की ये रब जानता है।
कभी ढक लेंगे सूखे पत्ते कभी कब्र पे मेरी बरसात होगी कभी ढक लेंगे सूखे पत्ते कभी कब्र पे मेरी बरसात होगी