जीवन
जीवन
पढ़ते आए शास्त्र पुराणों में,
पहला सुख नीरोगी काया है ।।
यह जानते हुए भी ऐ मानव !
क्यों कुमार्ग पर भरमाया है ।।
मानव जीवन मिला बड़े यत्नों से,
इसको क्यों झुठलाया है ।।
छोड़ दुर्व्यसनों को आगे बढ़ ,
कर चरितार्थ उत्तम कर्म , यही तेरी माया है ।।
