Mistry Surendra Kumar
Inspirational
आओ मिलकर संकल्प धरें
मानव हित में कुछ काम करें।
स्वार्थ त्याग परमार्थ करें
जन-जन का संताप हरें।
न्याय नीति धर्म अहिंसा
मानवता की बुनियाद भरें।
ईश्वर की इस अद्भुत रचना को,
व्यर्थ कर्म कर कलुषित न करें।
आओ मिलकर संकल्प धरें.........
प्रकृति
मानवता
ग़रीब की व्यथा
कर्मवीर
बालक
आत्म साक्षात्...
पर्यावरण संरक...
नैतिकता
जीवन
संकल्प
तो क्या हुआ की आसमान उसका असीम और ख़्वाब सुनहरे है तो क्या हुआ की आसमान उसका असीम और ख़्वाब सुनहरे है
इतनी शिद्दत से ना तुम मोहब्बत करना, यह मोहब्बत तुमको जिंदा लाश बनाएगा। इतनी शिद्दत से ना तुम मोहब्बत करना, यह मोहब्बत तुमको जिंदा लाश बनाएगा।
आओ इस फरवरी को यादगार बनाते हैं. प्यार का एक अलग ही किस्सा तुम्हें बताते हैंं. आओ इस फरवरी को यादगार बनाते हैं. प्यार का एक अलग ही किस्सा तुम्हें बताते हैंं...
नारी तुम हो शक्तिशाली , लक्ष्मी सरस्वती और हो काली। नारी तुम हो शक्तिशाली , लक्ष्मी सरस्वती और हो काली।
सुख के दरमियान सब होते हैं साथ साथ दुख के दरमियान कोई न देता साथ। सुख के दरमियान सब होते हैं साथ साथ दुख के दरमियान कोई न देता साथ।
अधरों को जिसके छू के मधुर धुन है बज रही। अधरों को जिसके छू के मधुर धुन है बज रही।
छोड़ न पाये मोह मवाली। ईश बचाये आस लगा ली छोड़ न पाये मोह मवाली। ईश बचाये आस लगा ली
ये जिंदगी इम्तिहान लेती है शूरवीरों को पूरा मान देती है ये जिंदगी इम्तिहान लेती है शूरवीरों को पूरा मान देती है
काश! मैंने मेहनत की होती तो आज मैं डॉक्टर होता काश! मैंने मेहनत की होती तो आज मैं डॉक्टर होता
खुद की खोज में निकल तू चल बस तू चल। खुद की खोज में निकल तू चल बस तू चल।
ज़हर रख कर कहां जाओगे आखिर तो ख़ाक बनकर मिटी मे मिल जाओगे! ज़हर रख कर कहां जाओगे आखिर तो ख़ाक बनकर मिटी मे मिल जाओगे!
धर्म का शांति का हर अंत में छुपा संदेश है। धर्म का शांति का हर अंत में छुपा संदेश है।
आशीष हमेशां देती रहना मां, "प्रिया"ममतामयि तुम हो महान।। आशीष हमेशां देती रहना मां, "प्रिया"ममतामयि तुम हो महान।।
झूठे सपनों में जो भी जिया करते हैं । अंतरात्मा मलिन कर , वो ही रोया करते हैं ।। झूठे सपनों में जो भी जिया करते हैं । अंतरात्मा मलिन कर , वो ही रोया करते हैं ...
झुलसे कोई तेज़ धूप में और किसी को मधुर शाम मिले। झुलसे कोई तेज़ धूप में और किसी को मधुर शाम मिले।
हम तो हैं एक दूजे के लिए फ़िर खामोश हम कैसे रहें। हम तो हैं एक दूजे के लिए फ़िर खामोश हम कैसे रहें।
चलो कर्म करें, नम्र बनें, शब्दों को तोलें अनमोल हैं चंद पल ज़िन्दगी के। चलो कर्म करें, नम्र बनें, शब्दों को तोलें अनमोल हैं चंद पल ज़िन्दगी के।
तो आज भी गांधीवाद है प्रासंगिक। हे सेवाग्राम के विश्र्व राजनीतिक संत। तो आज भी गांधीवाद है प्रासंगिक। हे सेवाग्राम के विश्र्व राजनीतिक संत।
अहम्मनयता का त्याग करके ही परम शांति मिलती है। अहम्मनयता का त्याग करके ही परम शांति मिलती है।
तुम हो ममता का अगाध अनंत आसमान, हूँ मैं तेरे आँचल में बसा एक छोटा सा विहग समान। तुम हो ममता का अगाध अनंत आसमान, हूँ मैं तेरे आँचल में बसा एक छोटा सा विहग समा...