Mistry Surendra Kumar
Inspirational
आओ मिलकर संकल्प धरें
मानव हित में कुछ काम करें।
स्वार्थ त्याग परमार्थ करें
जन-जन का संताप हरें।
न्याय नीति धर्म अहिंसा
मानवता की बुनियाद भरें।
ईश्वर की इस अद्भुत रचना को,
व्यर्थ कर्म कर कलुषित न करें।
आओ मिलकर संकल्प धरें.........
प्रकृति
मानवता
ग़रीब की व्यथा
कर्मवीर
बालक
आत्म साक्षात्...
पर्यावरण संरक...
नैतिकता
जीवन
संकल्प
मैं फूलों सा ही खिलता हूँ मैं दीपक हूँ, मैं जलता हूँ। मैं फूलों सा ही खिलता हूँ मैं दीपक हूँ, मैं जलता हूँ।
आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश। आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश।
चन्दा सोहे शीश पर , काम नशावन हार । मोह निशा का नाश कर , ज्ञान दिवस दातार।। चन्दा सोहे शीश पर , काम नशावन हार । मोह निशा का नाश कर , ज्ञान दिवस दातार।।
मैंने विरासत में करोड़ो पाने वालो को, छिपने में सुकून महसूस करते देखा है| मैंने देखा है, मैंने विरासत में करोड़ो पाने वालो को, छिपने में सुकून महसूस करते देखा है| मैंने द...
हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं। हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं।
प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया। प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया।
अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत। अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत।
तुम फिर प्रयास करो यशवंती अपना भुजबल आजमाओ तुम। तुम फिर प्रयास करो यशवंती अपना भुजबल आजमाओ तुम।
पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में। पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में।
मैंने कहा- "तुम स्त्री जात हो इसीलिए भावनाओं की गंगा में बहती रहती हो मैंने कहा- "तुम स्त्री जात हो इसीलिए भावनाओं की गंगा में बहती रहती हो
एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार बड़ा किया एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार ...
खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में
वक़्त का दामन थामे रहना ये जीवन का सार मत करो। वक़्त का दामन थामे रहना ये जीवन का सार मत करो।
हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है। हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है।
एक संभावनाओं की दुर्घटना अधिक लगता है, और मन में अनायास अवांछित होने का भाव जगता है एक संभावनाओं की दुर्घटना अधिक लगता है, और मन में अनायास अवांछित होने का भाव ज...
जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला। जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला।
“अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार। “अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार।
खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन। खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन।
हम मनोहर दूरवर्ती, कार्यक्रम चलाएं। अपने सभी बच्चों का,हम सब ग्रुप बनाएं। हम मनोहर दूरवर्ती, कार्यक्रम चलाएं। अपने सभी बच्चों का,हम सब ग्रुप बनाएं।
जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे। जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे।