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Anju Singh

Abstract


4.7  

Anju Singh

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जीवन के कई रंग

जीवन के कई रंग

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जीवन में कई रंग है बिखरे

कुछ हैं हल्के कुछ हैं गहरे


यह हंसते हैं लहराते हैं

कई खुशियां बिखराते हैं


हंसता रंग खुशी दे जाता

गम का रंग फीका कर जाता


आत्मा का रंग होता सच्चा

प्रेम पुष्प सा खिल जाता


पक्के रंग बिखरें कुदरत ने

और कच्चे रंग इंसानों ने


छल के रंग में कई रंगें

पर दृढ़ रंग विश्वास का


सपनों के पूरा होने पर

छलक जाते सतरंगी रंग


टूट जाए जो सपने 

दिख जाता बेरंगी रंग


इंद्रधनुष बन जाता है 

जब कई रंग मिल जाते हैं


शब्दों के रंग रचना बनकर

होंठों पर मुस्कुराते हैं


भावों के रंग चेहरे पर आकर

दुःख सुख बतलाते हैं


रोज हमें देखने को मिलते

कई रंग अपनों के बेगानों के


मनचाही रंगों से हम

कई खुशियों के चित्र उकेरते हैं


मन जब खुश हो जाए तो

खुशियां ही खुशियां बिखेरते हैं


उम्मीद का रंग होता मनभावन

छिड़क देता एहसास पावन


संतोष के रंग में हो जाते तृप्त

ना रहती कोई इच्छा अतृप्त


प्यार के रंग में रंगे सभी

कल आज हो या अभी


कहीं छांव कहीं धूप है

रंगों के विविध रुप हैं


उत्सवी माहौल में छिपी 

सबकी कुछ अभिलाषा है


ना जाने इन रंगों की 

कितनी लंबी परिभाषा है



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