STORYMIRROR

दशरथ जाधव

Tragedy

3  

दशरथ जाधव

Tragedy

जहर का कहर

जहर का कहर

1 min
199

विज्ञान से मनु जितना दौड़ा

एक कहर से आज अड़ा

प्रकृति तेरे सामने ये जीव

हाथ बाँधे दोनो मूक है खड़ा। 


इस जीवन-ए-पवन को भी

महा बुद्धिवंत तूने नहीं छोड़ा,

शुद्धता का पैगाम जो ले जाए

वही आज ज़हर लेकर है खड़ा।


रिश्तों की दूरियों को एक पल में

करके खत्म अपनों में जाना पड़ा,

आँचल में कुछ भी तो नहीं है,

इस कारण था तू पिता से लड़ा।


पर छोड़ के शहर की भीड़ को

गाँव के आँचल में आना पड़ा,

सालों से जो राह ताकते थे तेरी

क्या अब तेरे डर ने मन को छेड़ा?


         



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy