STORYMIRROR

Sandeep Kumar

Classics Fantasy Children

4  

Sandeep Kumar

Classics Fantasy Children

जब उसे पंछी की भांति उड़ने

जब उसे पंछी की भांति उड़ने

1 min
315

वह चलती है तो चलने दे

राहों को भी बदलने दे

वह छोटी भोली भाली गुड़िया है

उसे डगर डगर पर मचलने दे।।


उससे उसकी पंख खिलेगी

साहस और धैर्य बढ़ेगी

और आने वाली बाधाओं से 

तभी तो सहजता से लड़ सकेगी।।


और योग्य कुशल बलशाली होगी

आंखों में अंगार लिए बाधाओं से भिड़ेंगी

किसी को धीतकारते किसी को पुचकारते 

उच्च शिखर पर तभी तो चढ़ेगी।।


और नव नया नवेला सोला बनके

कभी झांसी तो कभी आग का गोला बनके

किसी से भी टक्कराने की साहस करेगी

जब उसे पंछी की भांति उड़ने देगी-२।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics