जानते हो
जानते हो
मै हमेशा झूठ कहती हूं कि मैं मिलूंगी तुमसे,
मैं कभी तुमसे मिलना नही चाहती,
मैं नही खोना चाहती वो ताजगी
और वो इंतजार जो मेरी आंखे हरवक्त देखती है,,
मैं वो कशिश हमेशा अपने दिल में
समेटकर रखना चाहती हूं,
जो मुझे तुमसे एकबार मिल लेने की बेहताशा इच्छा लिए रहती है,
मै तुमसे मिलने के बाद फिर दूर नही जाना चाहती,
और मुझे मालूम है
मिलने के बाद हमे अपने अपने
रास्ते पर वापस आना ही पड़ेगा,
वो दूरी मुझे नही चाहिए,
तो मै एक बार के मिल लेने भर से
अपनी ये नजदीकी नही खोना चाहती ,
मैं तुमसे नही मिलना चाहती...
मै तुमसे झूठ कहती हूं
मै भी तुमसे मिलना चाहती हूं ।

