Karan Mistry
Romance
तुम खफा हो के दूर चले गये
फिर भी मैं खुदा से सजदा करता हूं।
पर एक बात सच्ची बोलूँ
आज भी मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
वो बात तो बरसों के पहले की है
आज मैं उसका ज़िक्र करता हूँ।
तू मेरे कल आज और कल में हो
आज फिर तुझे इज़हार-ए-इश्क़ करता हूँ।
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लिख दिया
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार। तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार।
निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है! निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है!
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा। हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा।
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर और आधा.. याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर ...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था। मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था।
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।
खिलौने तो ख़रीद लूँगा पर खिलौनों से भी कहीं जी बहलता है खिलौने तो ख़रीद लूँगा पर खिलौनों से भी कहीं जी बहलता है