STORYMIRROR

Bushra Wasim

Romance

3  

Bushra Wasim

Romance

इश्क

इश्क

1 min
261

इश्क में खुद को जलाकर देखा है 

इश्क में चोट खा कर देखा है 

कर डालते है बरबाद हुस्न वाले हमने दिल लगा कर देखा है 

बड़ा खुदगर्ज है जमाना हमने अपनो को आजमा कर देखा है

घटता नहीं है अश्क का सागर हमने हर रोज आंसू बहा कर देखा है

छोड़ दिया अपनो का साथ

एक हमसफर के लिए एक ऐसा हमसफर बना कर देखा है ............

जो हकीकत ही बन जाए ख्वाब वो सपना सजा कर देखा है 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance