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प्रवीन शर्मा

Romance

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प्रवीन शर्मा

Romance

इततु सी बारिश कर दो

इततु सी बारिश कर दो

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माना गलती हुई, कुछ पेड़ ना लगाए हंसी के

मुस्कुरा दो थोड़ा सा ही, पर मुझे माफ़ कर दो

गर्मी कितनी है तेरे प्यार के बिन, जां सूख गई

अजी सुनते हो, जरा प्यार की बारिश कर दो


हर बात पर नफरत की लू क्यों छोड़ देते हो

बदली बन पास आती हूँ तुम उड़ के चल देते हो

थक गया है मेरा हाथ फिर भी पंखा झलती हूँ

सुनो ना , जरा प्यार की बारिश कर दो

कितनी माफी मांगती हूँ मुझे माफ कर दो


सर्दी में कहा था कोई भा गया है हमे , ठिठोली की थी

बुरा इतना ना मानो मजाक का, गलती की थी

अब भीग गया है आँचल चलो भी जिद छोड़ो

ऐ जी, सुनो ना इततु सी बारिश कर दो

मैं तुम्हारी थी तुम्हारी हूँ चलो माफ कर दो


कहे देती हूं यू दिल के दरवाजे से जाना ठीक नही

भले मानस को यू सताना तेरा ठीक नही

पपीहा दादुर मोर और मैं सभी तुझको मनाते है

ओ मेघा काले, सुनो ना जम के बरसात कर दो

भीग जाने दो मुझे, प्यार की बारिश कर दो.


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