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अनजान रसिक

Abstract Classics Inspirational

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अनजान रसिक

Abstract Classics Inspirational

इतिहास होली के पर्व का

इतिहास होली के पर्व का

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होली के इस पवित्र पर्व की ऐतिहासिक कथा सुनाती हूँ आज,

संक्षेप में बतलाती हूँ होलिका के वध की कथा और देवयोग से प्रह्लाद के बचने का वृत्तांत।

कैसे प्रह्लाद भगवान विष्णु का परमभक्त बन लीन हो गया उनकी उपासना में,

किस प्रकार एक पिता ने हर संभव प्रयास किया मारने का अपने पुत्र को ही,

खटका जब ये भक्तिभाव पुत्र का असुराधिपति हिरण्यकश्यप की नज़रों में।


संग में बतलाती हूँ भक्ति में समाहित असीमित शक्ति का बल

जिसके सौजन्य से असुराधिपति अपने समस्त प्रयासों में हो गए विफल

जब चले मारने वो प्रह्लाद को लगाते हुए अपना समस्त सामर्थ्य और बल।

तब मदद की गुहार लगाने बहन होलिका के पास आये,

उम्मीद लिए बस यही कि पुत्र से मुक्ति के प्रयोजन में सफल होने में मदद मिल जाए।  


होलिका ने तब विष्णु जी के वरदान स्वरुप प्राप्त अग्नि रोधक चादर का इस्तेमाल करने का निश्चय किया,

ओढ़ के उसको गोद में प्रह्लाद को ले कर बैठ गयी अग्निकुंड में,जहां धूं-धूं करके जल रही थी चिता।  

वेदना और करुणा से भर गया विष्णु जी का ह्रदय उस पल,

एक इशारे पे तब उनके चादर उड़ कर प्रह्लाद पर जा गिरी और राक्षसी होलिका धधकती अग्नि की बलि चढ़ गयी।


अत्याचार और पाप का कुछ इस तरह अंत कर पृथ्वी का उद्धार कर दिया प्रभु ने,

विषम परिस्थति में भक्त की रक्षा करके अपने प्रति विश्वास कायम कर दिया भक्तजनों के मन में।  

बस उसी क्षण से,उस दिवस को प्रह्लाद का गुणगान गाने हेतु पर्व के रूप में सभी मनाने लगे,

अत्याचारी होलिका के अंत की इस बेला पर जश्न और उत्सव आयोजित कर ख़ुशी व्यक्त करने लगे।  


जब-जब बुराई की परमकाष्ठा हुई है, भगवान पृथ्वी पर इसी प्रकार अवतरित हो कर अपने भक्तों के रक्षक बने हैं,

बुराई पर अच्छाई की विजय हुई है,कुछ इसी अनोखे अंदाज़ में सभी प्राणी कष्टों से सदा के लिए मुक्त हुए हैं।  

रंगा-रंग कार्यक्रम और रंगों की यह बेला अति उत्कृष्ट और अद्भुत है ,

बैर दिल के एक पल में ही लुप्त हो जाते जब लोग गले मिलते कहते :-"बुरा ना मानो होली है"।  


गुजियों और जलेबियों की मिठास सबके जीवन में चाशनी घोल देती,

नरसिंह रूप में भगवान के प्रकट होने की इस स्वर्णिम बेला को और भी मधुर व स्नेहिल बना देती।  


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