इश्क़ का नगमा...
इश्क़ का नगमा...
तेरे इश्क़ का नगमा
जब इस दिल को छू जाता है
ना बोल पाता हूँ, ना बयाँ कर पाता हू
ऐसा दर्द उभर के आता है
सारी दुनिया धुंधली सी लगती है
दिखता है बस यार मुझे
सारे रिश्ते झुटे लगे
सच्चा लगे प्यार मुझे
तेरे हुस्न से चाँद भी परहेज करे
जब तू दहलीज पे आता है
ना बोल पाता हूँ ना बयाँ कर पाता हूँ
ऐसा दर्द उभर के आता है।

