इश्क की मूरत
इश्क की मूरत
परी जैसी हो तुम, बहुत अफलातून लगती हो,
तुम्हारी अदा दिखाकर मुझ को, मदहोश तुम बनाती हो।
रात को ख्वाबों में आ कर तुम, निंद्रा मेरी उड़ाती हो,
दिन रात तुम मुझ को, बेचैन ही बना देती हो।
बहुत खूबसूरत हो तुम, चांद को भी शरमाती हो,
मुख से नकाब हटाओ तो, खुदा की कयामत लगती हो।
रात रानी जैसी हो तुम, रात भर महकती रहती हो,
जरा पास आ कर बैठो तो तुम, मेरी ही अमानत लगती हो।
हुस्न की मल्लिका हो तुम, क्यूं मुझ से शरमाती हो।
बांहों में सिमट जाओ तो "मुरली", इश्क की मूरत लगती हो।

