इश्क़ की ख़ुश्बू
इश्क़ की ख़ुश्बू
तेरे इश्क़ की ख़ुश्बू रूह को हर पल महकाती
बाँहों में भरकर जन्नत सा सुकून देकर जाती
हो गए शामिल तेरी ज़िंदगी में अब इस कदर
जागती रातों में हर रोज़ याद तुम्हारी सताती
धड़कन तुम मेरे दिल की हो बेइंतहा मोहब्बत
जहाँ भी हूँ देखती तस्वीर तुम्हारी नज़र आती
बेरूख़ी, बेरंग सी हो जाती है दुनिया तेरे बिना
मौजूदगी चेहरे पर मुस्कुराहट के रंग बिखराती
जुदा न होते इक दूजे से चाहे हो जाए कुछ भी
भरे प्यार जहाँ में वो बेपनाह चाहत कहलाती

