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Shital Yadav

Romance Fantasy


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Shital Yadav

Romance Fantasy


दास्ताँ-ए-मोहब्बत

दास्ताँ-ए-मोहब्बत

1 min 234 1 min 234

गुलज़ार ज़िंदगी यूँ इश्क़ का लाती है पैगाम

होगी मुलाक़ात सनम से रखना दिल ये थाम 


लगा ले चाहे बंदिशें लाख ज़ालिम ये ज़माना 

फिर भी होकर रहेगा मुकम्मल यूँ अफ़साना 


दूर से ही मिलन की ऐसे आहट देकर जाती

तेरे जिस्म की महक फ़िज़ाएँ यूँ लेकर आती


तोड़कर दीवारें मज़हब की बसाएँगे नया जहाँ

चाहत ही रवायत हो ज़िंदगी की दिलों में वहाँ


बदलेंगे दस्तूर दास्ताँ-ए-मोहब्बत ऐसी लिखेंगे

हो जाएँगे अमर यूँ ज़र्रे-ज़र्रे में हम-तुम दिखेंगे।


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