STORYMIRROR

Nalanda Satish

Romance

3  

Nalanda Satish

Romance

इश्क का चाँद

इश्क का चाँद

1 min
11.6K

इश्क का चाँद बसा मेरी पलकों पर 

निगाहों मे सपनों का मेला लग गया 


अटरिया से अपलक देखे इश्क का चाँद

हवाओं का आँगन बुहारने लग गया 


नज़रों का काजल बना इश्क का चाँद

बगिया जीवन की खिलाने मे लग गया


दर्द से बिलख रहा था इश्क का चाँद

बांहों में आकर धीरे-धीरे सिमटने लग गया 


हुस्न की चाहत से बदला इश्क का चाँद

ईद की तैयारियों मे दिल से लग गया 


इस कदर दीवाना हुआ इश्क का चाँद

शाहजहाँ ताजमहल बनाने मे लग गया 


इत्र की महक फैली है इश्क के चाँद से

इक चाँद को दूसरा चाँद देखने मे लग गया 


कैसे मुख मोड़े उस इश्क के चाँद से 'नालंदा'

रोशनी से दुधिया जो जीवन को भर गया



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nalanda Satish

Similar hindi poem from Romance