STORYMIRROR

हरीश कंडवाल "मनखी "

Fantasy

4  

हरीश कंडवाल "मनखी "

Fantasy

इशारा तो कर दो

इशारा तो कर दो

1 min
280

अगर तुम हमसे नाराज नहीं

फिर खफा खफा से क्यों हो

कह दो जो भी कहना है तुमको

नहीं कुछ कहना तो फिर चुप क्यों हो।


 हुई है गर हमसे कोई नादानियाँ

नादान समझ कर दुलार कर दो

दिल की आवाज को समझे हम कैसे

ऐसा कोई प्यार से इशारा तो कर दो।


 उम्र ही तो ढली है, दिल तो जवां है

बाल ही तो सफेद हुए, मन तो युवा है

जमाने ने भले हमें उम्र दराज बताया हो

मोहब्बत तो आज भी वहीं वैसे ही जिंदा है।


 ये मोहब्बत भी बड़ी अजीब है

गैरों को भी अपना बना देती है

जब इश्क होता है किसी से

खुद को भी इसमें लुटा देती है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy