Mrugtrushna Tarang
Drama Romance
बर्बस फिरूँ
नैन में तेरे आने
को, जगे तू जो!!
आज़ाद हिंद के ...
आख़िर क्यों?
ग़नीमत है तुम ...
तपती धूप
होली की फ्लाई...
तुमसे ही..
मूषक जी परनाम...
बेशकीमती नगीन...
न रहा ऐतबार
गीले शिकवे
अच्छे बुरे की सीख जहाँ पाई थी फिर क्यूँ दादी कहती थी माँ कि मैं तो एक पराई थी? अच्छे बुरे की सीख जहाँ पाई थी फिर क्यूँ दादी कहती थी माँ कि मैं तो एक पराई थी?
दिशा निर्देशों में क्यों हर पल सोचना चाहिए मुझे कि ये लोग क्या कहेंगे। दिशा निर्देशों में क्यों हर पल सोचना चाहिए मुझे कि ये लोग क्या कहेंगे।
पर बाबा का वो बलिदान हर बार उनको जीता रही था। पर बाबा का वो बलिदान हर बार उनको जीता रही था।
मुझको हल्के में मत लेना, मैं मोद नहीं, मैं तो मोदी हूँ। मुझको हल्के में मत लेना, मैं मोद नहीं, मैं तो मोदी हूँ।
आ रहा हूँ मैं, तेरे प्यार के लिए। आ रहा हूँ मैं, तेरे प्यार के लिए। आ रहा हूँ मैं, तेरे प्यार के लिए। आ रहा हूँ मैं, तेरे प्यार के लिए।
उस चाँद को भी फिर से, चंदा मामा बुलाते। उस चाँद को भी फिर से, चंदा मामा बुलाते।
खुद से मैं समझ लूँ कुछ भी उसकी आँखें देख कर मुस्कुरायी थी। खुद से मैं समझ लूँ कुछ भी उसकी आँखें देख कर मुस्कुरायी थी।
फिर भी सांसें, धड़कन, आशा और विश्वास भागती दौड़ती जिंदगी मुम्बई की शान। फिर भी सांसें, धड़कन, आशा और विश्वास भागती दौड़ती जिंदगी मुम्बई की शान।
क्या सवाल अमृत पीकर आये हैं! क्या सवाल अमृत पीकर आये हैं!
मुझे नहीं पता, मुझे क्यूँ हैं पसन्द ये सफ़ेद, जालीदार, फूलों के उभार वाले पर्दे! मुझे नहीं पता, मुझे क्यूँ हैं पसन्द ये सफ़ेद, जालीदार, फूलों के उभार वाले प...
ये सवाल करती है, "शकुन" मेरे बीते पलों का हिसाब करती है ! ये सवाल करती है, "शकुन" मेरे बीते पलों का हिसाब करती है !
अपना अपना प्रारब्ध झेलते हुए हम आज भी ख्वाब बुन रहे हैं शायद। अपना अपना प्रारब्ध झेलते हुए हम आज भी ख्वाब बुन रहे हैं शायद।
चूल्हा चौका मेरी जिम्मेदारी. पढ़े मेरी गुड़िया रानी चूल्हा चौका मेरी जिम्मेदारी. पढ़े मेरी गुड़िया रानी
अब सब मगन हैं अपनी अपनी ज़िन्दगी में अलग अलग साथियों के साथ ! अब सब मगन हैं अपनी अपनी ज़िन्दगी में अलग अलग साथियों के साथ !
खामोश सा मैं हो गया हूँ कुछ भी ना कह पाऊंगा आज बेबसी को अपने साथ में ले जाऊंगा। खामोश सा मैं हो गया हूँ कुछ भी ना कह पाऊंगा आज बेबसी को अपने साथ में ले जाऊंग...
खिड़की थोड़ी खुली रह भी जाये खिड़की थोड़ी खुली रह भी जाये
जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ, जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ ! जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ, जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ !
कृपया बेवजह घर से बाहर निकलों ना कोरोना को देश से बाहर निकालों ना। कृपया बेवजह घर से बाहर निकलों ना कोरोना को देश से बाहर निकालों ना।
मैंने संझौ के रखे है रंगों को तुम्हारे लिए मैंने जमा रखी है पानी फुग्गो में तुम्हारे लिए मैंने संझौ के रखे है रंगों को तुम्हारे लिए मैंने जमा रखी है पानी फुग्गो में तु...
क्या हम कभी भूल पाएंगे वो दिन नहीं भूल पाएंगे नवोदय के वो दिन। क्या हम कभी भूल पाएंगे वो दिन नहीं भूल पाएंगे नवोदय के वो दिन।