Jisha Rajesh
Romance
जाने कितनी सदियाँ बीत गयी
पर आज भी मैं उसका इंतजार करती हूँ।
कभी मिलन तो न हो पाया उससे
पर आज भी उससे प्यार करती हूँ।
मलिन
तोड़ दो बंधन
प्यार की भाषा
परिवार
रुको, सोचो, आ...
उड़न खटोला
माँ
बूढ़ा भिखारी
तनहाईयाँ
सम्यक राह
आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर। आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर।
जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहते हैं। जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहत...
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी। एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी।
निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है! निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है!
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा। हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा।
माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना, माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना,
याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर और आधा.. याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर ...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
अब मैं बताता भी तो क्या बताता अब बताने को ज्यादा कुछ। अब मैं बताता भी तो क्या बताता अब बताने को ज्यादा कुछ।
तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे पारिजात। तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे प...
रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को। रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को।
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।