STORYMIRROR

Ekta Sharma

Tragedy

3  

Ekta Sharma

Tragedy

इंसानियत

इंसानियत

1 min
311


इंसान शब्द अनजाना सा हो गया,

इंसानियत को मरे हुए तो जमाना हो गया!

कुछ घूरती नजरें चुभ जाती हैं,

सर पर ढकी चुन्नी जबरन खींची जाती है,

अब तो हर रिश्ता बेगाना हो गया,

इंसानियत को मरे हुए तो जमाना हो गया!


मुंह पर तेजाब पेट्रोल डाला जाता है,

वो शैतान अपनी हैवानियत के लिए क्या क्या कर जाता है,

अपनी करनी के परिणाम से वो अनजाना हो गया,

इंसानियत को मरे हुए तो जमाना हो गया!


मां की आंखों में एक फिक्र सी दिखाई देती है,

घर में और बाहर सबकी नजरों से अपनी बेटी को बचाती है,

मां!आज का समय देखकर लगे सही तेरा घबराना हो गया,

इंसानियत को मरे हुए तो जमाना हो गया!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy