STORYMIRROR

संजय असवाल "नूतन"

Abstract

4  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract

इंसानियत नहीं सीखी

इंसानियत नहीं सीखी

1 min
303

कहते हैं 

जब तक उम्र होती है 

तब तक सीखता है इंसान,

जहां से मिले 

जैसा मिले

वहां से सीखता है इंसान,

कभी किताबी बातों से 

कभी खुद से,

कभी दूसरों के गुजरे अनुभवों से,

कभी आस पास 

बिखरी यादों से,

कभी गिरकर 

कभी दूसरों को गिराकर,

कभी किसी की 

उम्मीदों को तोड़ कर 

कभी किसी 

अपने के मन को रौंद कर,

कभी खुद का

सुध बुध खोकर 

कभी चैन अपना छीनकर

किसी की यादों को

रुला कर,

बस सीखने 

और जीतने का जुनून 

उसके जहन में 

इस कदर हावी होता है,

और इसी 

भागम भाग में 

वो भूल जाता है सीखना,

जो सबसे जरूरी है 

इस जीवन के लिए 

" इंसानियत".....!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract