इंकलाब
इंकलाब
आजादी के परवानों ने, बोल
दिया था इंकलाब का नारा
जाग उठा था गुलामी से भारत देश हमारा।
अंग्रेजों ने थे भारत देश में
लाखों जुल्म कमाये,
आजादी के परवानों ने
अपनी कुर्वानी से दूर
फिरंगी भगाए।
सुभाष चंद्र जी ने दिया था खून लेकर आजादी
पाने का नारा, लक्ष्मी बाई, मंगल पांडे , तात्यां टोपे इत्यादी की बहादुरी को देखकर गूंज उठा था भारत देश हमारा।
नेता जी ने आजाद हिन्द फौज से कर दी थी फिरंगी
की तबाही, भाग उठे यहां से
फिरंगी मिला न उनको कोई सहारा,
जाग उठा था गुलामी से
भारत देश हमारा।
भगत सिंह, चन्द्र शेखर, तिलक की कुर्वानी को कैसे हम भुलाएं,
धन्य थे वो सपूत भारत के थन्य थीं उनकी मातांए।
गांधी जी ने सत्यग्रह का अच्छा तीर चलाया, हर भारतीय के मन में आजादी का अलख जगाया,
सदा ऊंचा रहेगा तिरंगा हमारा, गूंजेगा इंकलाब का
नारा, धन्य हैं आजादी के परवाने धन्य देश हमारा।
याद रहेगा बलिदान दिवस,
याद रहेगा एक एक बलिदानी
का काम जो था न्यारा
नहीं भूल सकेगा सुदर्शन
आजाद भारत देश हमारा।
